निर्भया केस : दोषियों की मां, बहन ने कही हैरान करने वाली बातें, कहा- इन्हें फांसी नहीं एक चांस दिया जाए

 
निर्भया केस : दोषियों की मां, बहन ने कही हैरान करने वाली बातें, कहा- इन्हें फांसी नहीं एक चांस दिया जाए

नई दिल्ली : समाचार ऑनलाइन – निर्भया केस के चारों गुन्हेगार इन दिनों दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है। फांसी की तलवार उनपर लटकी हुई है। हालांकि कोर्ट ने अब तक दोषियों खिलाफ नया डेथ वारंट जारी नहीं किया है। इस पर अब दोषियों के परिवार का कहना है कि वह सभी निर्दोष है। दोषी मुकेश की मां ने कहा कि उसे एक चांस दें। उसकी मां ने कहा कि मेरे पास मुकेश के अलावा कोई नहीं है। इस मामले का प्रमुख आरोपी उसका भाई राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मौत की सजा पाए दोषी विनय कुमार की याचिका खारिज कर दी। विनय कुमार शर्मा ने राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोषी पवन गुप्ता की बहन ने भी मांग की कि उसके भाई को फांसी नहीं होनी चाहिए। वह निर्दोष है। तीसरे दोषी विनय शर्मा की मां ने कहा कि एक व्यक्ति की मौत के लिए पांच लोगों को फांसी नहीं दी जा सकती। परिवार के सदस्य दिल्ली की अदालत के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जो 23 साल की पीड़िता के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें चार दोषियों के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने अपने फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दोषियों के अधिकारों पर जोर देते हुए मामले की सुनवाई 17 फरवरी तक स्थगित कर दी।

इससे पहले मुख्य आरोपी राम सिंह ने मुकदमे की सुनवाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हमलावरों के सबसे क्रूर कहे जाने वाले किशोर आरोपी को तीन साल के लिए सुधारगृह में रखा गया था। उसे 2015 में रिहा कर दिया गया था और उनके जीवन के खतरे की चिंताओं के बीच उसे एक अज्ञात स्थान पर भेजा गया था। जब वह रिहा हुआ, वह 20 साल का था।

अदालत के बाहर पीड़िता के माता-पिता ने विरोध किया। निर्भया की मां ने हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर कहा था कि निर्भया को न्याय दो, निर्भया के दोषियों को जल्द से जल्द फांसी दो, अभी नहीं तो कभी नहीं, वी वांट जस्टिस के नारे लगाए। निर्भया के गुनहगार जानबूझकर मामले को लटका रहे हैं। कोर्ट भी सिर्फ उनकी बात ही सुन रही है। क्या कानून सिर्फ दोषियों के पक्ष में है, क्या पीड़ितों का कोई अधिकार नहीं है।

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