शिवसेना और राष्ट्रवादी पर जमकर बरसे उदयनराजे

 
शिवसेना और राष्ट्रवादी पर जमकर बरसे उदयनराजे
पुणे। सँवाददाता : भाजपा नेता जयभगवान गोयल की किताब ‘आज के शिवाजी नरेंद्र मोदी’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस, कांग्रेस व अन्य दलों ने इसके खिलाफ आंदोलन करते हुए पुस्तक पर पाबंदी लगाने की मांग की है। वहीं शिवसेना ने इस मुद्दे पर भाजपा में शामिल छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशजों से भी जवाब मांगा। मंगलवार को इस मुद्दे पर भूतपूर्व सांसद उदयनराजे भोसले ने इस पूरे मसले पर अपनी ‘स्टाइल’ में प्रतिक्रिया दी। छत्रपति शिवाजी महाराज की तेरहवीं पीढ़ी से आने वाले छत्रपति उदयन राजे भोसले ने इस किताब को वापस लेने की मांग करते हुए शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पर भी निशाना साधा है।
मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए उदयन ने शिवसेना द्वारा इसपर राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने शिवसेना के लिए कहा, अब शिवसेना का समय खत्म हो गया है, अब उसे अपना नाम बदल कर ठाकरे सेना कर लेना चाहिए। शिवसेना का नामकरण जब हुआ, तब क्या शिवसेना वंशजों को पूछा गया था? शिवसेना भवन में शिवाजी महाराज के ऊपर बालासाहब की तस्वीर लगी है। इसपर उद्धव ठाकरे को जवाब देना चाहिए। शिवसेना को अपना नाम बदल करके ठाकरे सेना कर देना चाहिए। नाम बदलने के बाद राज्य के कितने लोग आपके साथ रहेंगे।
उदयन राजे ने कहा, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज और नरेंद्र मोदी के बीच तुलना नहीं करनी चाहिए। लोगों को अपनी बुद्धि का सही इस्तमाल करना चाहिए था। किताब के बारे में सुनकर बहुत बुरा लगा। मुझे ही नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज पर प्यार करने वाले हर व्यक्ति को इस घटना से दुख पहुंचा है। छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना दुनिया में किसी से भी नहीं की का सकती। उन्होंने आगे कहा, ‘गोयल नाम के व्यक्ति का मैं महाराष्ट्र की जनता की और से निषेध करता हूं। जानता राजा एक ही थे, बाकी कोई नहीं। कोई भी पक्ष हो सभी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का इस्तमाल किया, ये दुख की बात है।’
भोसले ने आगे कहा, छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम अब तक कई पार्टियों ने सिर्फ अपने मतलब के लिए किया है। शिवाजी महाराज का नाम पर शिव वडापाव’ शुरू करना क्या उनका अपमान नहीं है? उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस खासकर पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार पर अपरोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि, राज्य में कुछ लोगों को जानता राजा की उपाधि दी जाती है। मेरी राय में केवल शिवाजी महाराज ही जानता राजा थे। वे युगपुरुष थे, उन्होंने कभी कोई भेदभाव नहीं किया। उनके वंशज के तौर पर कभी मैंने दिखावा नहीं किया। यह मेरा सौभाग्य आउट पिछले जन्म के पुण्य का असर है कि मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ। शिवाजी महाराज के गुणों को स्वीकार करें सीधे महाराज बनने की कोशिश न करें।

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