डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को लेकर उद्धव ठाकरे के मन में अलग तरह का प्रेम : भाजपा की तरह से मुख्यमंत्री पर निशाना

 
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को लेकर उद्धव ठाकरे के मन में अलग तरह का प्रेम : भाजपा की तरह से मुख्यमंत्री पर निशाना

मुंबई, 5 दिसंबर – मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उद्धव ठाकरे ने चैत्यभूमि में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का अभिवादन करने के लिए नहीं गए और महापरिनिर्वाण दिवस की तैयारी के लिए उन्होंने राज्य के प्रमुख के रुप में खुद से बैठक नहीं बुलाई। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का अभिवादन करने का समय नहीं है व उनका बाबासाहेब के प्रति प्रेम अलग तरह का है. यह बयान भाजपा विधायक भाई गिरकर ने दिया है. अब महापरिनिर्वाण  दिवस पर  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे चैत्यभूमि पर अभिवादन के लिए जाएंगे, यही उम्मीद है.

तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बैठकें आयोजित करते थे
भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि महापरिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर को चैत्यभूमि पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का अभिवादन  करने के लिए देश विदेश से लोग आते है. उनकी व्यवस्था के लिए पांच वर्ष खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बैठकें आयोजित करते थे. फडणवीस महापरिनिर्वाण दिवस की सुबह अभिवादन करने लिए मौजूद रहते थे. उनकी पहल पर राज्यपाल भी उनके साथ महापारिनिर्वांन दिवस पर अभिवादन की परम्परा शुरू की.

2014 में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री बनने पर चैत्यभूमि जाकर डॉ. बाबासाहेब का अभिवादन किया था. इसके मद्देनज़र इस बार के महापरिनिर्वाण दिवस की तैयारी को लेकर मंगलवार को मुंबई में हाई लेवल बैठक बुलाई गई थी. उस बैठक में केवल मंत्री सुभाष देसाई उपस्थित थे. जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, राष्ट्रवादी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोरात ने इससे दुरी बनाये रखी.  शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे 1978 में चैत्यभूमि में अभिवादन के लिए गए थे. लेकिन इसके बाद उनके परिवार से कोई भी चैत्यभूमि में अभिवादन के लिए नहीं गए.

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